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दिल्ली में जलभराव खत्म करने की तैयारी, 266 किमी नालों का होगा निर्माण और सुधार

नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में हर साल मानसून के दौरान होने वाले गंभीर जलभराव की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. CM रेखा गुप्ता के नेतृत्व में तैयार किए गए ड्रेनेज मास्टर प्लान को अब जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. इसके तहत, राजधानी में आधुनिक प्री- कास्ट तकनीक से नालों के निर्माण और रीमॉडलिंग का काम किया जाएगा. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों में प्री- कास्ट तकनीक से नालों के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं.

Nali Drain

पारंपरिक निर्माण पद्धति में नालों का निर्माण मौके पर कंक्रीट डालकर किया जाता है जिसमें काफी समय लगता है. वहीं, नई तकनीक में कंक्रीट के बड़े बॉक्स पहले से फैक्टरी या यार्ड में तैयार किए जाएंगे और बाद में निर्माण स्थल पर लाकर उन्हें क्रेन की मदद से जोड़ा जाएगा.

गुजरात मॉडल से ली प्रेरणा

अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक न केवल मजबूत और टिकाऊ है जिससे पानी की निकासी करना बेहतर होगी. निर्माण कार्य पहले की तुलना में काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा. इससे मानसून से पहले जरूरी परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी. बता दें कि दिल्ली सरकार इस योजना में गुजरात मॉडल से प्रेरणा ले रही है. गुजरात के कई शहरों में लंबे समय से प्री- कास्ट कंक्रीट तकनीक का इस्तेमाल जल निकासी व्यवस्था के लिए किया जा रहा है. शुरुआती चरण में समय पर काम पूरा करने के लिए विशेष प्री- कास्ट बॉक्स गुजरात से मंगवाए जा रहे हैं.

मिलेंगे 4 फायदे

  • निर्माण कार्य की अवधि काफी कम हो जाएगी.
  • सड़क किनारे निर्माण सामग्री रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी जिससे ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा.
  • धूल और प्रदूषण में कमी आएगी.
  • फैक्टरी में नियंत्रित वातावरण में तैयार होने के कारण कंक्रीट बॉक्स की गुणवत्ता और फिनिशिंग बेहतर होगा.

यहां होगा सुधार कार्य

योजना के तहत करीब 266 किलोमीटर लंबाई में नालों का निर्माण और सुधार कार्य किया जाना है. मुंडका में 7.7 किलोमीटर और माल रोड पर 9 किलोमीटर लंबे नालों का निर्माण प्रस्तावित है. समालखा, नजफगढ़, ढांसा रोड, सुरखपुर, गोयला डेयरी, मलिकपुर, दौराला बॉर्डर, पूसा रोड, रविदास मार्ग, मलिकपुर चौक, पंखा रोड, अजमल खां मार्ग, आजाद मार्केट और कुतुब रोड समेत कई इलाकों में भी इस तकनीक से काम किया जाएगा. कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू भी हो चुका है.ॉ

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