You are currently viewing झज्जर के बेटे राकेश काजला की बड़ी उपलब्धि, IMA से हासिल किया लेफ्टिनेंट पद; 3 पीढ़ियों की सैन्य विरासत

झज्जर के बेटे राकेश काजला की बड़ी उपलब्धि, IMA से हासिल किया लेफ्टिनेंट पद; 3 पीढ़ियों की सैन्य विरासत

झज्जर | उत्तराखंड के देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शनिवार को हुई पासिंग आउट परेड में झज्जर के राकेश काजला ने लेफ्टिनेंट के रूप में सफलता हासिल की. जैसे ही परिवार ने उन्हें अधिकारी की वर्दी में देखा, सभी की आंखों में खुशी और गर्व के आंसू आ गए. इस खास मौके पर राकेश के पिता अरुण काजला, मां रजनी, बहन रितू, जीजा हिमांशु, पत्नी माही और बेटी यश्वी भी मौजूद रहे. पूरे परिवार ने इस पल को यादगार बताया.

Rakesh Kajla Jhajjhar

राकेश का सपना बचपन से ही सेना में अधिकारी बनने का था. उनके दादा, ताऊ और पिता सभी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राकेश ने भी देश सेवा का रास्ता चुना.

सेना में भर्ती होने की तैयारी

उन्होंने गांव सौलधा के राजकीय स्कूल से 2008 में 10वीं और 2010 में 12वीं पास की. इसके बाद, उन्होंने बहादुरगढ़ के राजकीय कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई की. पढ़ाई के साथ ही उन्होंने सेना में भर्ती होने की तैयारी शुरू कर दी थी. दिसंबर 2013 में उनका चयन भारतीय सेना की जेके लाइट इन्फेंट्री में सिपाही के रूप में हुआ. हालांकि, परिवार की इच्छा थी कि वह अधिकारी बनें और राकेश का भी यही सपना था. इसी वजह से उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी.

IMA देहरादून में चयन

सेवा के दौरान उन्होंने सिपाही से लेकर लांस नायक, नायक और फिर हवलदार तक प्रमोशन हासिल किया. साल 2019 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके साथ ही, उन्होंने एससीओ- 58 कोर्स और टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स भी सफलतापूर्वक पूरा किया. मार्च 2025 में उन्होंने एसएसबी परीक्षा उत्तीर्ण कर IMA देहरादून में चयन पाया. कठिन प्रशिक्षण के बाद अब उन्होंने लेफ्टिनेंट का पद हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है.

लोगों में खुशी

सौलधा गांव की सरपंच लक्ष्मी काजला ने कहा कि राकेश की उपलब्धि से पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है. वहीं, उनके पिता अरुण काजला ने बेटे की सफलता पर खुशी जताई. राकेश अब भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में सेवाएं देंगे. उन्होंने कहा कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, अगर लगन और धैर्य हो तो सफलता जरूर मिलती है.
बता दें कि उनके परिवार में सेना की यह विरासत तीन पीढ़ियों से चल रही है, जिसे अब राकेश ने अधिकारी बनकर और आगे बढ़ा दिया है.

मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.

Source link

Leave a Reply