नई दिल्ली | पर्यटन को बढ़ावा देने की कड़ी में दिल्ली में शुरू की गई इलेक्ट्रिक डबल- डेकर टूरिस्ट बस को अपेक्षित संख्या में यात्री नहीं मिल पा रहे हैं. स्थिति यह है कि यात्रियों की संख्या इतनी कम है कि बस संचालन का खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है. इसके पीछे एक बड़ा कारण बस को चलाने के लिए लगातार प्रचार- प्रसार की कमी को भी माना जा रहा है. लॉन्च के बाद से अब तक 1,500 से ज्यादा यात्रियों ने इस बस में सफर किया है. शुरुआती महीनों में आंकड़े काफी कम रहे.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी को सेवा शुरू होने के बाद फरवरी में केवल 12 यात्री, मार्च में 432, अप्रैल में 372, मई में 424 और 12 जून तक 300 यात्रियों ने सफर किया है. अब तक कुल मिलाकर 1,540 यात्रियों ने इस सेवा का लाभ उठाया है. अधिकतर यात्री छुट्टियों और सप्ताहांत के दिनों में यात्रा करते हैं.
कीमतों में भी कटौती
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए परिवहन विभाग ने टिकट की कीमतों में भी कटौती की है. पहले बड़ों के लिए टिकट 500 रुपये थी जिसे घटाकर 300 रुपये कर दिया गया है. वहीं, बच्चों के लिए टिकट 300 रुपये से घटाकर 200 रुपये कर दी गई है. विभाग का मानना है कि इससे अधिक लोग इस सेवा की ओर आकर्षित हो सकते हैं. यह सेवा फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है. विभाग की योजना है कि भविष्य में लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर इसे और रूटों पर भी शुरू किया जाएगा. वर्तमान में यह बस दो प्रमुख रूटों पर संचालित हो रही है.
पर्यटकों के बीच लोकप्रिय
सप्ताह के दिनों में टूर विजय चौक से शुरू होते हैं और सेंट्रल विस्टा क्षेत्र की प्रमुख जगहों को कवर करते हुए प्रधानमंत्री संग्रहालय तक जाते हैं. सप्ताहांत पर टूर दिल्ली हाट, आइएनए से शुरू होते हैं और इनमें राष्ट्रपति भवन में चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी भी शामिल रहती है. इस रूट में राष्ट्रपति भवन, भारत मंडपम, नेशनल वार मेमोरियल, नया संसद भवन, दिल्ली हाट और प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं. चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी और नेशनल वार मेमोरियल पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं.
टूर एस्कॉर्ट भी मौजूद
दिल्ली सरकार ने यह इलेक्ट्रिक डबल- डेकर बस सेवा फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की थी. इस वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बस में 63 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. साथ ही, एक प्रशिक्षित टूर एस्कॉर्ट भी मौजूद रहता है जो यात्रियों को इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों की जानकारी देता है. इससे पहले दिल्ली की सड़कों पर डबल-डेकर बसें DTC द्वारा चलाई जाती थीं लेकिन पुरानी होने के कारण इन्हें 1989 में बंद कर दिया गया था.
