चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत रहे मृतक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने ऐसे कर्मचारियों के बकाया विभागीय ऋण को माफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनकी सेवा के दौरान या सेवानिवृत्ति के बाद मृत्यु हो चुकी है।
इस संबंध में मौलिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को पत्र जारी कर विस्तृत जानकारी मांगी है, ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जा सके।
सभी जिलों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
निदेशालय ने पीआरटी (PRT), टीजीटी (TGT), ईएसएचएम (ESHM) तथा प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत रहे उन मृतक कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने विभाग से किसी प्रकार का ऋण लिया था और जिनके मामलों का अभी तक निपटारा नहीं हो पाया है।
जिला अधिकारियों को निर्धारित प्रोफार्मा में सभी जानकारियां भरकर मुख्यालय भेजने के लिए कहा गया है।
लंबित मामलों की होगी पहचान
विभाग ने अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि संबंधित मामले किस स्तर पर लंबित हैं और कितने समय से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
इस पहल से वर्षों से लंबित पड़े मामलों की पहचान हो सकेगी और मृतक कर्मचारियों के परिवारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।
फाइलें लंबित रखने वालों की भी तय होगी जवाबदेही
मौलिक शिक्षा निदेशालय ने संकेत दिए हैं कि जिन मामलों में फाइलें लंबे समय से बिना कार्रवाई के लंबित पड़ी हैं, उनमें जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
मुख्यालय ने जिलों से निम्न जानकारियां मांगी हैं:
- मृतक कर्मचारी का नाम
- पद का नाम
- मृत्यु की तिथि
- संबंधित स्कूल का नाम
- मामले की वर्तमान स्थिति
- लंबित रहने की अवधि
आश्रित परिवारों को मिलेगा बड़ा लाभ
पूरी जानकारी मिलने के बाद विभाग ऋण माफी से संबंधित फाइलों का तेजी से निपटारा करेगा। इससे मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को आर्थिक राहत मिल सकेगी।
कई परिवार लंबे समय से विभागीय प्रक्रियाओं और लंबित फाइलों के कारण परेशान थे तथा उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। अब निदेशालय की इस पहल से उम्मीद है कि पात्र परिवारों को जल्द राहत मिलेगी और उन पर पड़ा आर्थिक बोझ कम होगा।
सरकार का उद्देश्य
विभाग का मुख्य उद्देश्य मृतक कर्मचारियों के परिवारों को राहत प्रदान करना और वर्षों से लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
एक नजर में
- मृतक शिक्षकों और कर्मचारियों के विभागीय ऋण माफ करने की तैयारी।
- सभी जिलों से लंबित मामलों की रिपोर्ट तलब।
- PRT, TGT, ESHM सहित अन्य कर्मचारियों के रिकॉर्ड मांगे गए।
- लंबित फाइलों की समीक्षा कर जल्द होगा निपटारा।
- आश्रित परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद।
- लापरवाही वाले मामलों में जवाबदेही भी होगी तय।