चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि जो किसान लंबे समय तक प्राकृतिक या जैविक खेती करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे, उन्हें सरकार की ओर से कृषि भूमि पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार नई नीति तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में आयोजित प्राकृतिक खेती एवं क्लस्टर गठन कार्यक्रम के दौरान की। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी उपस्थित रहे।
2000 एकड़ के क्लस्टर में शुरू होगी प्राकृतिक खेती
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 2000 एकड़ के क्लस्टर के रूप में आधुनिक तकनीक के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। यह योजना स्मार्ट एग्रीकल्चर मॉडल पर आधारित होगी।
उन्होंने कहा कि यदि योजना से जुड़े किसानों को किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई सरकार द्वारा की जाएगी, ताकि किसान बिना किसी डर के प्राकृतिक खेती अपना सकें।
10 साल तक प्राकृतिक खेती करने वालों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कृषि विभाग की करीब 800 एकड़ सरकारी भूमि केवल उन किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 वर्षों तक प्राकृतिक या जैविक खेती करने का संकल्प लेंगे।
सरकार इस संबंध में नई नीति तैयार कर रही है, जिससे अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित हो सकें।
2022 में शुरू हुई थी प्राकृतिक खेती योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार ने वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना की शुरुआत की थी। किसानों की सुविधा के लिए एक विशेष पोर्टल भी बनाया गया है।
अब तक इस पोर्टल पर करीब 2 लाख किसान पंजीकरण करवा चुके हैं, जो इस योजना की लोकप्रियता को दर्शाता है।
किसानों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में चार प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं:
- गुरुकुल कुरुक्षेत्र
- हमेटी, जींद
- मंगियाना, सिरसा
- घरौंडा, करनाल
गुरुकुल कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय सलाहकार की नियुक्ति भी की गई है। यहां अब तक 12,188 किसान, महिलाएं और सरकारी कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
मोरनी बनेगा प्राकृतिक खेती का मॉडल क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पंचकूला जिले के मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक और जैविक खेती के मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रयोगों और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्राकृतिक खेती से बचेंगे जल, जंगल और जमीन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की प्राचीन परंपरा का हिस्सा रही है। सदियों तक इसी खेती पद्धति ने भूमि की उर्वरता बनाए रखी और पर्यावरण को सुरक्षित रखा।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन हमारे जीवन का आधार हैं और इनके संरक्षण के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना समय की जरूरत है।
रासायनिक खेती पर जताई चिंता
कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र की 180 एकड़ भूमि पर पूरी तरह प्राकृतिक खेती की जा रही है, जहां रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता।
वहीं कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राकृतिक खेती का विस्तार जरूरी है, क्योंकि रासायनिक खेती का असर जमीन, फसलों और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
किसानों के लिए क्या होगा फायदा?
- प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा।
- 10 साल तक प्राकृतिक खेती करने वालों को सरकारी जमीन पट्टे पर मिल सकेगी।
- नुकसान होने पर सरकार सहायता प्रदान करेगी।
- खेती की लागत कम होगी।
- मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हरियाणा सरकार की यह पहल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।